21 वीं शताब्दी में वैज्ञानिक चेतना

By Promote Science - November 28, 2016

आज विज्ञान और प्रौद्योगिकी जनमानस की दिनचर्या का एक अहम हिस्सा बन चुका है। तो सवाल आज ये है कि आज हम सब एक वैज्ञानिक बन चुके है या विज्ञान एक कठपुतली मात्र है। सुबह आँखें खोलने से लेकर रात को सोने तक  हमारी इस्तेमाल होने वाली हर चीज में विज्ञान और प्रौद्योगिकी ने अपना अंश छोड़ रखा है। आज भारत जब विश्व के सिरमौर बनने की और अग्रसर है , तो क्या विज्ञान का इसमें कोई भूमिका हो सकती है , जवाब है हाँ। आज वो जन जो कभी अपने जीवन में विद्यालय का मुँह तक नहीं देखा , आज ये सपने जरूर देख रहे है कि उनके संतान अच्छे विद्यालय में पढ़े , विज्ञान पढ़े अभियांत्रिकी (इंजीनियरिंग), डॉक्टरी पढ़े , आदि और विज्ञान के प्रति उनकी रुचि सराहनीय है। अगर संसाधनों को एक मूल के रूप में देखें तो सबकी अपनी एक सीमा है और प्रकृति प्राप्त मात्रा में इसका सृजन किये हुए है , लेकिन जरुरत और लालच के मध्यस्थ पहुँच हम इसकी बारिकी को समझने में अब भी बहुत पीछे है। जैसे-जैसे हमारी चेतना विस्तृत होती गयी और आज जो हम वैज्ञानिक तरीके अपना रहें है चाहे कृषि में हो, संचार में हो या किसी अन्य क्षेत्र में , कहीं न कहीं किसी ना किसी रूप में एक उन्नत जीवन की और सदा बढ़ रहे हैं। लेकिन फिर भी इसकी समझ आम जान से कहीं दूर है।  आपने भी सुना होगा , "आवश्यकता आविष्कार की जननी है" , तो क्या हम केवल सामाजिक दायित्वों को पूरी करने के लिए ही आविष्कार करते हैं। अगर देखा जाये तो हमारा हर आविष्कार या खोज समाज को और बेहतर बनाने के लिए ही है या प्रतिबद्ध है। पर एक छोटा खेमा ही इस कार्य में लगा हुआ है जिसे हम प्रायः वैज्ञानिक या अभियंता (इंजीनियर ) के नाम से जानते है और एक बेहद बड़ा वर्ग एक उपभोक्ता के रूप में। मगर ये सूरत बदल सकती है , और इसे आप और हम मिलकर ही बदल सकते है। जो आज उपभोक्ता है वो भी तरक्की के इस राह में सहयोगी बन सकते है , बस दिनचर्या में वैज्ञानिक तरीके अपना कर। 

आपके हर जिज्ञासा के तृप्ति के लिए हम प्रतिबद्ध हैं । आइये जुड़े और समाज के हर वर्ग को जोड़े एक उन्नत भारत और उन्नत विश्व की और अग्रसित 21 वीं  सदी में। 

आपके सुझाव और हर प्रश्न का सादर आमंत्रण है इस " Promote Science"  के मंच पर। 

जय विज्ञान, जय भारत !

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